आज का उभरता चेहरा आज तक यही होते आया है , की जिसके हाथ में सत्ता उसकी पुरी पिढी सत्तामे होगी।जिसकी लाठी उसकी भैंस।पर अब का युवा वर्ग जाग चुका है।राजनिती को हमेशा - हमेशा से ही ग॑दा माना गया है।पर ये ग॑दगी आयी कहासे ? क्यु ये ग॑दगी साफ नहीं होती ? क्यो हमेशा सत्तासे गिने चुने मुठ्ठीभर लोगों के हाथों मे ही है।क्या बाकी लोगमे काबीलियत नहीं है ? या सिर्फ गुलामियों की तरह पिढी दर पिढी चलती आ रही वहीं गुलामियों को हमेशा - हमेशा हमेशा हम कबुल करे ले ? क्यों आखिर क्यों ? यही गुलामी की जंजीरो को तोड़कर मन में आजादी की उमंग लेकर , वो आजादी जो अटलजी ने दी , वो आजादी जो बाबासाहेब ने दी , वो आजादी जो महात्मा फुलेजी ने दी । उठो और ज्ञान का दामन थामकर आगे बड़। वो ही विचारोंके आजादी जो वसंतराव नाइकजी ने दी। इतने बड़े बड़े महात्मा इस पुण्य भूमिपर आकर आपने ज्ञान का विस्त...